Friday, November 19, 2010
छठ की छुटियों में इस बार मुजफ्फरपुर में
इस बार जब मैं अपनी नानी के घर मुजफ्फरपुर , बिहार गया तो मैं अपने अंकल के ऑफिस भी गया. वहां उनका चश्मा लगाकर खूब फोटो भी खिचवाया. तभी उनके यहाँ एक और छोटा बच्चा आ गया . पहले तो हम दोनों ने साथ में थोड़ा खेला और फिर जानते हैं क्या हुआ...
Friday, November 5, 2010
Deepawali Card
ये देखिये मैंने अपना कार्ड कितनी खूबसूरती से सजाया है . अच्छा लगा न. मैंने पेपर के टुकरे को काट काट के अनार बनाया है . बढ़िया है न.
Happy Diwali
दिया, अनार, बम, घिरनी, रॉकेट छोरिये, और मेरे दिए हुए लड्डू के पैकेट से एक लड्डू खा कर अपना मुंह दीवाली पे मीठा कीजिये. मेरी ख़ुशी तो बलून के बिना अधूरी है इसलिए आप सब भी मेरी ख़ुशी में शामिल होकर बलून उड़ाइए और मजे कीजिये. .
Thursday, November 4, 2010
मै और मेरा दोस्त डोरेमोन
ये है मेरा प्यारा दोस्त डोरेमोन. हम दोनों की तरफ से आप सबों को दीपावली की शुभकामनाएँ . आज तो मैं सिर्फ शुभकामना दे रहा हूँ कल हम सब मिलकर मिठाइयाँ खायेंगे और पटाखे छोड़ेंगे . चलूँ अब थोड़ा कल की तयारी कर लूं. तो फिर कल मिलते हैं. मेरे घर तो आप सब आ नहीं सकते पर मेरे ब्लॉग पे आना जरूर. हैप्पी दीपावली
Wednesday, October 13, 2010
Sunday, October 10, 2010
Friday, October 8, 2010
Monday, October 4, 2010
Friday, September 24, 2010
सितम्बर में आम का मज़ा
आज जब मैं स्कूल से लौटा तो देखा की मेरे छोटे से आम के पेड़ का एक आम पक गया है तो मैंने उसे तोड़ लिया और उसे चखा. जितना छोटा मैं हूँ उतना ही छोटा
मेरा पेड़ है पर उसमें जाड़े में भी फल लगता है. वैसे पता नहीं ये आम कैसे छुट गया क्योंकि बाकी टिकोलों को तो मैं रोज सुबह तोड़ कर जमीन में गाड कर पेड़ उगने की कोशिस किया करता था.
Thursday, September 23, 2010
मुझे ढूँढो तो जानू
देखा इतना बड़ा गुब्बारा की इसके पीछे से मैं ही नज़र नहीं आ रहा हूँ. मुझे देखना है तो बस एक पिन की जरूरत पड़ेगी. पिन चुभाओ और मुझे पाओ. लेकिन उसके बाद मुझे चुप करना बहुत ही मुस्किल काम है क्योंकि जब मैं रोना शुरु करता हूँ तो चुप नहीं होता हूँ . balloon से खेलना मुझे बहुत पसंद है. अगर गलती से एक फूट गया तो पापा को उसी समय दूसरा लाना पड़ता है.
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मैं और मेरा आम 