Friday, November 19, 2010

आज विश्व बाल अधिकार दिवस है. सभी बच्चों को मेरी तरफ से शुभकामना .

छठ की छुटियों में इस बार मुजफ्फरपुर में

इस बार जब मैं अपनी नानी के  घर मुजफ्फरपुर , बिहार गया तो मैं अपने अंकल के ऑफिस भी गया. वहां उनका चश्मा लगाकर खूब फोटो भी खिचवाया. तभी उनके यहाँ एक और छोटा बच्चा आ गया . पहले तो हम दोनों ने साथ में थोड़ा खेला और फिर जानते हैं क्या हुआ...
कैसा लग रहा हूँ. अच्छा न.
भैया ये चश्मा मुझे दे दो न प्लीज .
स्टाफ अंकल ने मुझसे चश्मा लेकर उसे दे दिया, कहा की वह छोटा है. तो क्या मैं भी तो छोटा ही हूँ और वैसे भी ये मेरे अंकल का  है.
गुस्सा ..... इसने मेरा चश्मा ले लिया और स्टाइल में फोटो खिचवा रहा है
बड़े होने में बहुत दिक्कत है . मेरे बारे में कोई नहीं सोचता . मै भी दुखी हूँ.

Friday, November 5, 2010

Deepawali Card

ये देखिये मैंने अपना कार्ड कितनी खूबसूरती से सजाया है . अच्छा लगा न. मैंने पेपर के टुकरे को काट काट के अनार बनाया है . बढ़िया है न.

Happy Diwali

दिया, अनार, बम, घिरनी, रॉकेट छोरिये, और मेरे दिए हुए लड्डू के पैकेट से एक लड्डू खा कर अपना मुंह दीवाली पे मीठा कीजिये. मेरी ख़ुशी तो बलून के बिना अधूरी है इसलिए आप सब भी मेरी ख़ुशी में शामिल  होकर बलून उड़ाइए और मजे कीजिये.  .

Thursday, November 4, 2010

मै और मेरा दोस्त डोरेमोन

ये है मेरा प्यारा दोस्त डोरेमोन. हम दोनों की तरफ से आप सबों को दीपावली की शुभकामनाएँ . आज तो मैं सिर्फ शुभकामना दे रहा हूँ कल हम सब मिलकर मिठाइयाँ खायेंगे और पटाखे छोड़ेंगे . चलूँ अब थोड़ा कल की तयारी कर लूं. तो फिर कल मिलते हैं. मेरे घर तो आप सब आ नहीं सकते पर मेरे ब्लॉग पे आना जरूर. हैप्पी दीपावली

Wednesday, October 13, 2010

Sunday, October 10, 2010

sun bath


ये आराम का मामला है.....

Friday, October 8, 2010

Happy Durga Puja

दुर्गा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ

Monday, October 4, 2010

देखो हँसना नहीं

यूँ ही एक दिन

दिल ने कहा
चलो करें कुछ नया....

रंग बिरंगा मेरा घर

रंग बिरंगा घर ये मेरा
देखो कितना प्यारा
मुझको तो ये लगता है
सारे जहाँ से न्यारा

Friday, September 24, 2010

सितम्बर में आम का मज़ा


आज जब मैं स्कूल से लौटा तो देखा  की मेरे छोटे से आम के पेड़ का एक आम पक गया है तो मैंने उसे तोड़ लिया और उसे चखा. जितना छोटा मैं हूँ उतना ही छोटा

  मेरा पेड़ है पर उसमें जाड़े  में भी फल लगता है.  वैसे पता नहीं ये आम कैसे छुट  गया क्योंकि बाकी टिकोलों को तो मैं रोज सुबह तोड़ कर जमीन में गाड कर पेड़ उगने की  कोशिस किया करता था.

मेरा आम

मैं और मेरा आम


Thursday, September 23, 2010

मुझे ढूँढो तो जानू

देखा इतना बड़ा गुब्बारा की इसके पीछे से मैं ही नज़र नहीं आ रहा हूँ. मुझे देखना है तो बस एक पिन की जरूरत पड़ेगी. पिन चुभाओ और मुझे पाओ. लेकिन उसके बाद मुझे चुप करना बहुत ही मुस्किल काम है क्योंकि जब मैं रोना शुरु करता हूँ तो चुप नहीं होता हूँ . balloon से खेलना मुझे बहुत पसंद है. अगर गलती से एक फूट गया तो पापा को उसी समय दूसरा लाना पड़ता है.