Thursday, November 25, 2010

मोर

देखो बनाया है मैंने ये मोर
केउ केउ का यह करता शोर

7 comments:

चैतन्य शर्मा said...

Bahut hai aapka banay mor....

Majaal said...

मोर भी अच्छा बनाया है और केउ केउ भी बहुत अच्छा जमाया है तुकबंदी में उस्ताद आपने ;)

shikha kaushik said...

bahutsundar mor banaya hai aapne ''sparsh '' .shukamnaye .kabhi mere blog ''mera aapka pyara'' blog par bhi aaye ,is par maine aap jaise chote-chote doston ke liye kavitaye v kahani likhi hai .

shikha kaushik said...

bahut achha laga....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

ब्यूटीफुल क्रिएशन!
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा तो बाल चर्चा मंच पर भी लगाई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/11/29.html

rashmi said...

मोर तो अच्छा बना है...लेकिन सुना है तुम्हारा दाँत भी केव -केव कर रहा है...बच के रहना..

रावेंद्रकुमार रवि said...

बहुत सुंदर! मन को भा गया!